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शिखर
हर सुबह सूरज भी करे एक नई शुरुवात…फिर तू क्यूं हिचकिचाता है।शिखर पर पहुंचने की कोशिश में चींटी,गिरता है बार बार और बार बार वो चढ़ता है ।गिरते संभालते हर बार एक नई सिख मिलेगा तुझे…मगर हौसले बुलंद हो तो एक दिन शिखर खुद आवाज देगा तुझे… Written by Prabhamayee Parida