खुद पे एहसान ना कर

खुद पे एहसान ना कर,जो दिल करे कर तू बेफिकर.. लोग रोकेंगे,बस तू रुक ना जाना,कभी टोके तो पीछे मुड़ ना जाना…माना की सफर आसान नही होगा,पर तू घबरा ना जाना..कभी ठोकर से गिर भी जाए,तो खुद को तू संभाल ही लेना… सफर में मुसाफिर भी मिलेंगे,कुछ भटका देते हैं तो कुछ सही राह भीContinue reading “खुद पे एहसान ना कर”

Reply to “wo purane din”

चलो फिर से पुराने दिन को जीने की कोशिश करते हैं…अकेले नहीं, चलो हम साथ में कदम बढ़ाते हैं… मंजिल का भले ही पता न हो, मगर किसी भी राह को चुन लेते हैं…पहले औरों के खता से टूट गए थे, आज चलो खुद ही खता करलेते हैं…. आज चलो हम फिर से पुराने दिनContinue reading “Reply to “wo purane din””

कश्मकश

इस कश्मकश में खुद को उलझाए रखा था हमने,आसमान को जमीन से मिलाने की जिद्द जो की थी हमने,हर नामुमकिन कोशिश भी किया,और नतीजे की परवा न किया,थी जुनून आसमान में खुशियों का रंग बिखेरू..थी शिद्दत जमीन के इश्क से आसमान को करूं रूबरू.. अब जब हुआ सबेरा,और पर्दा उठा इस बेवकूफी से..चाहे करे कोशिशContinue reading “कश्मकश”