तू हर कदम मेरे साथ चले
ये ख्वाहिश कभी ना थी।
तू हर लम्हा मेरे करीब रहे,
ऐसी तकाजा कभी ना थी।
गुज़ारिश बस इतनी सी,
दूर से ही सही, तुझे दीदार करने की इजाजत हो।
नोकझोक भी हो और बातें करे बेसुमर,
बस ऐसी किस्मत हो।
कुछ मांगे तू मुझसे ,
उससे कायम करने की है ये सुरूर।
काश तू याद करे मुझे
कहीं भी रहूं में आऊंगी जरूर।
हो सके तो इस मोहब्बत को पागलपन ना समझना ,
कोई आश नहीं तुझसे फिर भी इश्क है, बस इतना है कसूर।
Written by prabhamayee parida